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Subhash Saini Podcast

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By Prof. Subhash Chander
जिंदगी में भरोसा पैदा करने वाले व्यक्तियों, घटनाओं व रचनाओं से परिचय।
साहित्यिक-सास्कृतिक-कलात्मक रूचियों का परिष्कार।
सत्य आधारित संवेदनशील-समतामूलक, न्यायपूर्ण व विवेकशील समाज का निर्माण।
महात्मा बुद्ध, कबीर, रैदास, गुरुनानक देव, जोतीबा फुले, सावित्री बाई फुले, डा. भीमराव आंबेडकर, शहीद भगतसिंह आदि प्रगतिशील विचारकों की चिंतन परंपरा का विकास।
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140. Ambedar's Struggle (विरासत) जाति के खिलाफ डा. आंबेडकर का संघर्ष - सुभाष चंद्र

Subhash Saini Podcast

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159. कृष्ण काव्य धारा के कवि (मीरा, रहीम, रसखान)
 कृष्ण काव्य धारा के कवि (मीरा, रहीम, रसखान)
26:04
June 28, 2022
158. कृष्ण भक्ति काव्य
कृष्ण भक्ति काव्य
29:13
June 22, 2022
157. सूफी काव्य और मलिक मुहम्मद जायसी
 सूफी काव्य और मलिक मुहम्मद जायसी
27:47
June 22, 2022
156.संत काव्यधारा के कवि (संत रविदास, सुंदरदास, दादूदयाल)
संत काव्यधारा के कवि (संत रविदास, सुंदरदास, दादूदयाल)
21:59
June 11, 2022
155. संत काव्यधारा और कबीर
155. संत काव्यधारा और कबीर
26:41
June 09, 2022
154. भक्तिकालीन काव्य धाराओं की पृष्ठभूमि
154. भक्तिकालीन काव्य धाराओं की पृष्ठभूमि
28:15
June 09, 2022
153. भक्तिकाल की परिस्थितियां
153. भक्तिकाल की परिस्थितियां
23:51
June 09, 2022
152. आदिकालीन लौकिक धारा के कवि अमीर खुसरो और विद्यापति
आदिकालीन लौकिक धारा के कवि अमीर खुसरो और विद्यापति
28:52
June 09, 2022
151. आदिकालीन साहित्य की जैन व रासो धाराएं
 आदिकालीन साहित्य की जैन व रासो धाराएं
24:17
June 09, 2022
150. आदिकालीन साहित्य की जैन व रासो धाराएं
आदिकालीन साहित्य की जैन व रासो धाराएं
24:17
June 09, 2022
149. आदिकालीन साहित्य की सिद्ध और नाथ
आदिकालीन साहित्य की सिद्ध और नाथ 
29:10
June 09, 2022
148. आदिकाल की परिस्थितियां
 आदिकाल की परिस्थितियां
19:26
June 09, 2022
147. हिंदी साहित्य के इतिहास का काल विभाजन और नामकरण
 हिंदी साहित्य के इतिहास का काल विभाजन और नामकरण
19:32
June 09, 2022
146. हिंदी साहित्येतिहास लेखन का इतिहास
 हिंदी साहित्येतिहास लेखन का इतिहास
21:26
June 09, 2022
145. Concept of History and History of Literature/ इतिहास और साहित्येतिहास की अवधारणा
इतिहास और साहित्येतिहास की अवधारणा
22:09
June 09, 2022
143. Freedom of Writer by Bhisham Sahni/निबंध/ लेखक की स्वतंत्रता का सवाल - भीषण साहनी
Freedom of Writer by Bhisham Sahni /निबंध/  लेखक की स्वतंत्रता का सवाल - भीषण साहनी
13:29
June 05, 2022
142. Bharat Mata by Sumitranandan Pant/कविता/भारत माता- सुमित्रानंदन पंत
Bharat Mata by Sumitranandan Pant  भारत माता- सुमित्रानंदन पंत कविता 
24:41
June 05, 2022
141. Prem Chand Ji by Shiv Poojan Sahay (संस्मरण) प्रेमचंद जी - शिवपूजन सहाय
Prem Chand Ji by Shiv Poojan Sahay (संस्मरण)  प्रेमचंद जी - शिवपूजन सहाय
27:57
June 05, 2022
140. Ambedar's Struggle (विरासत) जाति के खिलाफ डा. आंबेडकर का संघर्ष - सुभाष चंद्र
(विरासत) जाति के खिलाफ डा. आंबेडकर का संघर्ष - सुभाष चंद्र
05:44
June 05, 2022
139. Bhasha Ka Prashan by Maha Devi Verma भाषा का प्रश्न- महादेवी वर्मा
 Bhasha Ka Prashan by Maha Devi Verma भाषा का प्रश्न- महादेवी वर्मा
11:06
June 05, 2022
138. (कहानी) - वांङ्चू- भीष्म साहनी
वांङ्चू- भीष्म साहनी
23:06
June 05, 2022
137. Kavita Kya Hai by #RamChanderShukla/ कविता क्या है (भाग -3) - #रामचंद्रशुक्ल
Kavita Kya Hai by #RamChanderShukla/ कविता क्या है (भाग -3) - #रामचंद्रशुक्ल
26:35
June 05, 2022
136. Kavita Kya Hai by #RamChanderShukla/ कविता क्या है (भाग -2) - #रामचंद्रशुक्ल
Kavita Kya Hai by #RamChanderShukla/ कविता क्या है (भाग -2) - #रामचंद्रशुक्ल
27:24
June 05, 2022
135. Kavita Kya Hai by #RamChanderShukla/ कविता क्या है (भाग -1) - #रामचंद्रशुक्ल
Kavita Kya Hai by #RamChanderShukla/ कविता क्या है (भाग -1) - #रामचंद्रशुक्ल
29:09
June 05, 2022
134. Shaheed Udham Singh by Subhash Chander (जीवनी) शहीद उधमसिंह की आत्मकथा - सुभाष चंद्र
(जीवनी) शहीद उधमसिंह की आत्मकथा - सुभाष चंद्र
52:06
June 05, 2022
133. Bhartendu by Radhakrishan Das (संस्मरण) भारतेंदु हरिश्चंद्र - राधाकृष्ण दास
भारतेंदु हरिश्चंद्र - राधाकृष्ण दास (संस्मरण)
30:46
June 05, 2022
132. My Mother make Me Fan Of Premchand by Muktibodh / मेरी मां ने मुझे प्रेमचंद का भक्त बनाया - मुक्तिबोध
My Mother make Me Fan Of Premchand by Muktibodh /  मेरी मां ने मुझे प्रेमचंद का भक्त बनाया - मुक्तिबोध (संस्मरण)
16:59
June 05, 2022
131.Vyaomkesh Shastri Urf Hajari Prasad Diwedi / व्योमकेश शास्त्री उर्फ हजारी प्रसाद द्विवेदी
Vyaomkesh Shastri Urf Hajari Prasad Diwedi / व्योमकेश शास्त्री उर्फ हजारी प्रसाद द्विवेदी
13:19
June 05, 2022
130. Sahitya Aur Cinema by Gulzar / साहित्य और सिनेमा - गुलजार
Sahitya Aur Cinema by Gulzar / साहित्य और सिनेमा - गुलजार
16:48
June 05, 2022
129. Tradition and Modernity by Hajari Prasad Dwivedi / परम्परा और आधुनिकता - आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
Tradition and Modernity by Hajari Prasad Dwivedi /  परम्परा और आधुनिकता - आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
20:42
June 05, 2022
128. Premchandji Bade-Bade Bahut Bade Hain by Surya Kant Tripathi Nirala / प्रेमचंदजी बड़े-बड़े बहुत बड़े हैं - निराला
(संस्मरण)  प्रेमचंदजी बड़े-बड़े बहुत बड़े हैं - निराला
14:17
June 05, 2022
127. Nationality By Ganesh Shankar Vidyarthi राष्ट्रीयता - गणेश शंकर विद्यार्थी
Nationality By Ganesh Shankar Vidyarthi  राष्ट्रीयता - गणेश शंकर विद्यार्थी
12:08
June 05, 2022
126. (संस्मरण) Bhartendu By Shiv Poojan Sahay भारतेंदु - शिवपूजन सहाय
Bhartendu By Shiv Poojan Sahay भारतेंदु - शिवपूजन सहाय 
14:52
June 05, 2022
125. (चिंतन) जातिप्रथा उन्मूलन के बारे में भीमराव अंबेडकर के विचार - सुभाष चंद्र
 (चिंतन) जातिप्रथा उन्मूलन  के बारे में भीमराव अंबेडकर के विचार - सुभाष चंद्र
14:35
June 04, 2022
124. Begam Pura by Guru Ravi Das (विरासत) बेगमपुरा - गुरु रविदास
(विरासत) बेगमपुरा - गुरु रविदास
10:47
June 04, 2022
123. Guru Nanak Dev Ji (विरासत) गुरुनानक देव - सुभाष चंद्र
(विरासत) गुरुनानक देव - सुभाष चंद्र
11:43
June 04, 2022
122. Karwa Ka Vrat by Yash Pal (कहानी) करवा का व्रत - यशपाल
(कहानी) करवा का व्रत - यशपाल
08:55
June 04, 2022
121. Ashadhya Veena by Agey (कविता ) असाध्य वीणा - अज्ञेय
(कविता ) असाध्य वीणा - अज्ञेय
18:54
June 04, 2022
120. Desh Kagaj PAr Bana Naksha Nahi Hota by Sarveshawar Dyal Saxsena (कविता) देश काग़ज़ पर बना नक़्शा -सर्वेश्वरदयाल सक्सेना
देश काग़ज़ पर बना नक़्शा -सर्वेश्वरदयाल सक्सेना  (कविता)
03:41
June 04, 2022
119.Akaal Aur Uske Baad by Nagarjun , (कविता) अकाल और उसके बाद - नागार्जुन
अकाल और उसके बाद - नागार्जुन (कविता) 
15:16
June 04, 2022
118. (कविता) - नचिकेता -कुंवर नारायण
नचिकेता -कुंवर नारायण
21:42
June 04, 2022
117. National Integration and Language Problem by Bhisham Sahni / राष्ट्रीय एकता और भाषा की समस्या - भीष्म साहनी
राष्ट्रीय एकता और  भाषा की समस्या - भीष्म साहनी
20:10
June 04, 2022
116. Rights of Women by Periyar E. V. Ramasamy / महिलाओं के अधिकार - ईवी रामास्वामी नायकर।
Rights of Women by Periyar E. V. Ramasamy / महिलाओं के अधिकार - ईवी रामास्वामी नायकर। 
17:24
August 09, 2021
115. Ateet Ki Smritiyan by Ram Chander Shukla / अतीत की स्मृति - आचार्य रामचंद्र शुक्ल
Ateet Ki Smritiyan by Ram Chander Shukla / अतीत की स्मृति - आचार्य रामचंद्र शुक्ल
14:57
August 04, 2021
114. Prasad: Jaisa Maine Paya by Amrit Lal Nagaar (संस्मरण) प्रसादः जैसा मैने पाया - अमृतलाल नागर
Prasad: Jaisa Maine Paya by Amrit Lal Nagaar  (संस्मरण) प्रसादः जैसा मैने पाया - अमृतलाल नागर
13:19
August 04, 2021
113. Sharat Ke Sath Bitaya Kuch Samay by Amrit Lal Nagar/ (संस्मरण) शरत के साथ बिताया कुछ समय - अमृतलाल नागर
Sharat Ke Sath Bitaya Kuch Samay by Amrit Lal Nagar/  (संस्मरण) शरत के साथ बिताया कुछ समय - अमृतलाल नागर
13:47
August 03, 2021
112. Bhola Ram Ka Jeev by Harishankar Parsai/ (कहानी) भोलाराम का जीव - हरिशंकर परसाई
Bhola Ram Ka Jeev by Harishankar Parsai/  (कहानी) भोलाराम का जीव - हरिशंकर परसाई
14:49
August 02, 2021
112. Kalam Ka Sipahi by Amri Rai/ प्रेमचंद : कलम का सिपाही - अमृतराय
हिंदी कथा सम्राट की जीवनी प्रेमचंद के व्यक्तित्व, जीवन-संघर्ष, विचारधारा और साहित्य पर सबसे विश्वसनीय जीवनी है उनके पुत्र अमृतराय द्वारा लिखी 'कलम का सिपाही'। Kalam Ka Sipahi by Amri Rai प्रेमचंद : कलम का सिपाही - अमृतराय
24:36
July 31, 2021
111. Mere Teen Guru Aur Teen Prerna by B R Ambedkar/ (संस्मरण) मेरे तीन गुरु और तीन प्रेरणा - डा. भीमराव अंबेडकर
Mere Teen Guru Aur Teen Prerna by B R Ambedkar/  (संस्मरण) मेरे तीन गुरु और तीन प्रेरणा - डा. भीमराव अंबेडकर
22:38
July 28, 2021
110. Future of Indian Democracy by B. R. Ambedkar/ भारतीय प्रजातंत्र का भविष्य - डा. भीमराव अंबेडकर
Future of Indian Democracy by B. R. Ambedkar/  भारत में प्रजातंत्र का भविष्य - डा. भीमराव अंबेडकर
17:02
July 27, 2021
109. हिंदी साहित्यकार सुदर्शन से डा. पद्म सिंह शर्मा कमलेश का साक्षात्कार
डा. पद्मसिंह शर्मा कमलेश द्वारा लिया गया यह साक्षात्कार सुदर्शन जी के व्यक्तित्व और साहित्य संबंधी विचारों पर प्रकाश डालता है। नवलेखक इससे काफी कुछ सीख सकते हैं। सुदर्शन (1895-1967) प्रेमचंद परम्परा के कहानीकार हैं।  मुंशी प्रेमचंद और उपेन्द्रनाथ अश्क की तरह सुदर्शन हिन्दी और उर्दू में लिखते रहे हैं। उनकी गणना प्रेमचंद संस्थान के लेखकों में विश्वम्भरनाथ कौशिक, राजा राधिकारमणप्रसाद सिंह, भगवतीप्रसाद वाजपेयी आदि के साथ की जाती है। अपनी प्रायः सभी प्रसिद्ध कहानियों में इन्होंने समस्याओं का आदशर्वादी समाधान प्रस्तुत किया है। चौधरी छोटूराम जी ने कहानीकार सुदर्शन जी को जाट गजट का सपादक बनाया था। केवल इसलिये कि वह पक्के आर्यसमाजी थे। सुदर्शन जी 1916-1917 में रोहतक में कार्यरत थे। सुदर्शन का असली नाम बदरीनाथ है। इनका जन्म सियालकोट में 1895 में हुआ था। "हार की जीत" पंडित जी की पहली कहानी है और १९२० में सरस्वती में प्रकाशित हुई थी। मुख्य धारा के साहित्य-सृजन के अतिरिक्त उन्होंने अनेकों फिल्मों की पटकथा और गीत भी लिखे हैं। सोहराब की सिकंदर (१९४१) सहित अनेक फिल्मों की सफलता का श्रेय उनके पटकथा लेखन को जाता है। सन 1935 में उन्होंने "कुंवारी या विधवा" फिल्म का निर्देशन भी किया। वे 1950 में बने फिल्म लेखक संघ के प्रथम उपाध्यक्ष थे। वे 1945 में महात्मा गांधी द्वारा प्रस्तावित अखिल भारतीय हिन्दुस्तानी प्रचार सभा वर्धा  साहित्य परिषद् के सम्मानित सदस्यों में थे। उनकी रचनाओं में तीर्थ-यात्रा, पत्थरों का सौदागर, पृथ्वी-वल्लभ आदि के नाम उल्लेखनीय हैं। फिल्म धूप-छाँव (1935) के प्रसिद्ध गीत तेरी गठरी में लागा चोर, बाबा मन की आँखें खोल आदि उन्हीं के लिखे हुए हैं। सुदर्शन जी महान लेखक थे ।
26:14
July 26, 2021
108. आचार्य चतुरसेन शास्त्री से डा. पद्मसिंह शर्मा कमलेश का साक्षात्कार
आचार्य चतुरसेन शास्त्री से डा. पद्मसिंह शर्मा कमलेश का साक्षात्कार
40:51
July 25, 2021
107. Tumhare Itihas Abhiman Ki Kshay by Rahul Sankrityayan / तुम्हारे इतिहास अभिमान की क्षय - राहुल सांकृत्यायन
Tumhare Itihas Abhiman Ki Kshay by Rahul Sankrityayan / तुम्हारे इतिहास अभिमान की क्षय - राहुल सांकृत्यायन
20:13
July 24, 2021
106. महादेवी वर्मा का डा. पद्म सिंह शर्मा से साक्षात्कार
महादेवी वर्मा का डा. पद्म सिंह शर्मा से साक्षात्कार महादेवी वर्मा (26 मार्च 1907-12 सितंबर 1987) हिंदी कविता के छायावादी युग के चार प्रमुख स्तंभों में से एक मानी जाती हैं। 1919 में इलाहाबाद में क्रास्थवेट कालेज से शिक्षा का प्रारंभ करते हुए उन्होंने 1932 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए. की उपाधि प्राप्त की। तब तक उनके दो काव्य संकलन 'नीहार' और 'रश्मि' प्रकाशित होकर चर्चा में आ चुके थे। अपने प्रयत्नों से उन्होंने इलाहाबाद में प्रयाग महिला विद्यापीठ की स्थापना की। इसकी वे प्रधानाचार्य एवं कुलपति भी रहीं। 1932 में उन्होंने महिलाओं की प्रमुख पत्रिका 'चाँद' का कार्यभार सँभाला। 1934 में नीरजा, तथा 1936 में सांध्यगीत नामक संग्रह प्रकाशित हुए। 1939 में इन चारों काव्य संग्रहों को उनकी कलाकृतियों के साथ वृहदाकार में 'यामा' शीर्षक से प्रकाशित किया गया। उन्होंने गद्य, काव्य, शिक्षा और चित्रकला सभी क्षेत्रों में नए आयाम स्थापित किए। इसके अतिरिक्त उनके 18 काव्य और गद्य कृतियाँ हैं जिनमें 'मेरा परिवार', 'स्मृति की रेखाएँ', 'पथ के साथी', 'शृंखला की कड़ियाँ' और 'अतीत के चलचित्र' प्रमुख हैं। सन 1955 में महादेवी जी ने इलाहाबाद में 'साहित्यकार संसद' की स्थापना की और पं. इला चंद्र जोशी के सहयोग से 'साहित्यकार' का संपादन सँभाला। यह इस संस्था का मुखपत्र था। स्वाधीनता प्राप्ति के बाद 1952 में वे उत्तर प्रदेश विधान परिषद की सदस्या मनोनीत की गईं। 1956 में भारत सरकार ने उनकी साहित्यिक सेवा के लिए 'पद्म भूषण' की उपाधि और 1969 में विक्रम विश्वविद्यालय ने उन्हें डी.लिट. की उपाधि से अलंकृत किया। इससे पूर्व महादेवी वर्मा को 'नीरजा' के लिए 1934 में 'सक्सेरिया पुरस्कार', 1942 में 'स्मृति की रेखाओं' के लिए 'द्विवेदी पदक' प्राप्त हुए। 1943 में उन्हें 'मंगला प्रसाद पुरस्कार' एवं उत्तर प्रदेश सरकार के 'भारत भारती' पुरस्कार से सम्मानित किया गया। 'यामा' नामक काव्य संकलन के लिए उन्हें भारत का सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान 'ज्ञानपीठ पुरस्कार' प्राप्त हुआ। उन्हें आधुनिक साहित्य की मीरा के नाम से जाना जाता है।
31:57
July 24, 2021
105. Tumhare Bhagwan Ki Kshaya by Rahul Sankrityayan / तुम्हारे भगवान की क्षय - राहुल सांकृत्यायन
तुम्हारे भगवान की क्षय - राहुल सांकृत्यायन Tumhare Bhagwan Ki Kshaya by Rahul Sankrityayan 
21:18
July 23, 2021
104. Jokon Tumhari Kshay by Rahul Sankrityayan / जोकों तुम्हारी क्षय हो - राहुल सांकृत्यायन
Jokon Tumhari Kshay by Rahul Sankrityayan जोकों तुम्हारी क्षय हो - राहुल सांकृत्यायन जो अपनी मेहनत से अपने जीने का ढंग न करके दूसरे का खून चूसकर मुटाता है उसे जोक कहा जाता है। कितनी जोकें हैं जो मेहनतकश मजदूर-किसान को चिपटी हैं. धर्म-मर्यादा, पूंजीवादी-सामंती. मेहनत की जय और जोकों की क्षय.
27:02
July 23, 2021
103. Tumhare Samaj Ki Kshay by Rahul Sankrityayan / तुम्हारे समाज की क्षय- राहुल सांकृत्यायन
Tumhare Samaj Ki Kshay by Rahul Sankrityayan  तुम्हारे समाज की क्षय- राहुल सांकृत्यायन
21:25
July 22, 2021
102. भगवतीचरण वर्मा से डा. पद्म सिंह शर्मा कमलेश का साक्षात्कार
भगवतीचरण वर्मा से डा. पद्म सिंह शर्मा कमलेश का साक्षात्कार जन्म: 30 अगस्त 1903, उन्नाव ज़िले के शफीपुर ग्राम में। शिक्षा: इलाहाबाद से बी.ए. एलएल. बी. की उपाधि। कार्यक्षेत्र: प्रारंभ में कविता लेखन फिर उपन्यासकार के नाते विख्यात। 1936 में फिल्म कारपोरेशन कलकत्ता में कार्य। विचार नामक साप्ताहिक पत्रिका का प्रकाशन संपादन। इसके बाद बम्बई में फिल्म कथा लेखन तथा दैनिक नवजीवन का संपादन। आकाशवाणी के कई केन्द्रों में कार्य। 1957 से स्वतंत्र लेखन। 'चित्रलेखा' उपन्यास पर दो बार फिल्म निर्माण और भूले बिसरे चित्र पर साहित्य अकादमी पुरस्कार। पद्मभूषण तथा राज्यसभा की मानद सदस्यता प्राप्त। निधन : 5 अक्तूबर 1981 में। प्रमुख कृतियाँ: उपन्यास: अपने खिलौने, पतन, तीन वर्ष, चित्रलेखा, भूले बिसरे चित्र, टेढ़े मेढ़े रास्ते, सीधी सच्ची बातें, सामर्थ्य और सीमा, रेखा, वह फिर नहीं आई, सबहिं नचावत राम गोसाईं, प्रश्न और मरीचिका, युवराज चूंडा, धुप्पल। कहानी संग्रह : मेरी कहानियाँ, मोर्चाबन्दी। कविता संग्रह : मेरी कविताएँ। संस्मरण : अतीत की गर्त से। साहित्य आलोचना : साहित्य के सिद्धांत तथा रूप। नाटक : मेरे नाटक, वसीयत। चित्रलेखा न केवल भगवतीचरण वर्मा को एक उपन्यासकार के रूप में प्रतिष्ठा दिलाने वाला पहला उपन्यास है बल्कि हिन्दी के उन विरले उपन्यासों में भी गणनीय है, जिनकी लोकप्रियता बराबर काल की सीमा को लाँघती रही है।चित्रलेखा की कथा पाप और पुण्य की समस्या पर आधारित है-पाप क्या है? उसका निवास कहाँ है ?
21:37
July 22, 2021
101. Tumhare Dharam Ki Kshaya by Rahul Sankrityayan/ तुम्हारे धर्म की क्षय - राहुल सांकृत्यायन
Tumhare Dharam Ki Kshaya by Rahul Sankrityayan/ तुम्हारे धर्म की क्षय - राहुल सांकृत्यायन धर्म के नाम पर गरीबों-निर्दोषों पर सैंकड़ों सालों से हिंसा, शोषण औऱ अत्याचार हो रहे हैं। फिर भी लोग उसके चक्रव्यूह में फंसे क्यों हैं ? जब धर्मों के प्रवर्तक समाज सुधारक की तरह दुनिया में आए तो बाद में उनके अनुयायी रुढ़़िवादी क्यों हुए ? सत्ता-भक्त क्यों बने ? धर्म और सांप्रदायिकता क्या एक चीज है ? धर्म की जय हो या क्षय ?
27:07
July 20, 2021
100. Tumhari Jaat Paant ki Kshay by Rahul Sankrityayan / तुम्हारी जात-पांत की क्षय - राहुल सांकृत्यायन
umhari Jaat Paant ki Kshay by Rahul Sankrityayan / तुम्हारी जात-पांत की क्षय - राहुल सांकृत्यायन
23:24
July 19, 2021
99. Vishnu Prabhakar Se Dr. Padam Singh Sharma Kamlesh Ka Sakshatkar/ (साक्षात्कार) विष्णु प्रभाकर से डा. पद्म सिंह शर्मा कमलेश का साक्षात्कार
Vishnu Prabhakar Se Dr. Padam Singh Sharma Kamlesh Ka Sakshatkar/  (साक्षात्कार) विष्णु प्रभाकर से डा. पद्म सिंह शर्मा कमलेश का साक्षात्कार
24:29
July 18, 2021
98. Shahid Sukhdev Ka patra Pita Ke Naam/ शहीद सुखदेव का पत्र ताया जी के नाम
शहीद सुखदेव का पत्र ताया जी के नाम Shahid Sukhdev Ka patra Pita Ke Naam/ 
08:50
July 18, 2021
97. (कविता) अथ रूपकुमार कथा - भगवत रावत
(कविता) अथ रूपकुमार कथा - भगवत रावत 
12:46
July 17, 2021
96. (कविता) राजे ने रखवाली की - निराला
राजे ने रखवाली की - निराला
05:19
July 17, 2021
95. Bhagat Singh Ka Antim Patra Sathiyon Ke Naam शहीद भगतसिंह का अंतिम पत्र साथियों के नाम
शहीद भगतसिंह का अंतिम पत्र साथियों के नाम Bhagat Singh Ka Antim Patra Sathiyon Ke Naam
04:47
July 17, 2021
94. Hamen Goli Se Uda Diya Jaye by Bhagat singh, Rajguru And Sukhdev / हमें गोली से उड़ा दिया जाए - शहीद भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव
हमें गोली से उड़ा दिया जाए - शहीद भगत सिंह, राजगुरु व सुखदेव Hamen Goli Se Uda Diya Jaye by Bhagat singh, Rajguru And Sukhdev / 
11:44
July 16, 2021
93. Pita Ke Naam Patar by Bhagat Singh / पिता के नाम पत्र - भगत सिंह
Pita Ke Naam Patar by Bhagat Singh / पिता के नाम पत्र - भगत सिंह
10:54
July 15, 2021
92. Vidyarthi Aur Rajniti by Bhagat SIngh / विद्यार्थी औऱ राजनीति - भगत सिंह
Vidyarthi Aur Rajniti by Bhagat SIngh / विद्यार्थी औऱ राजनीति - भगत सिंह
13:53
July 13, 2021
91. Dharam Aur Hamara Swatantrta Sangram by Bhagat Singh / धर्म और हमारा स्वतंत्रता संग्राम - भगत सिंह
धर्म और हमारा स्वतंत्रता संग्राम - भगत सिंह Dharam Aur Hamara Swatantrta Sangram by Bhagat Singh / Religion and Our Freedom Struggle by Bhagat singh
19:06
July 13, 2021
90. Sampradik Dange Aur Unka Ilaaj by Bhagat Singh / सांप्रदायिक दंगे और उनका इलाज - भगत सिंह
सांप्रदायिक दंगे और उनका इलाज - भगत सिंह Sampradik Dange Aur Unka Ilaaj by Bhagat Singh 
17:03
July 11, 2021
89. Achoot Samasya by Bhagat Singh / अछूत समस्या - भगत सिंह
Achoot Samasya by Bhagat Singh / अछूत समस्या - भगत सिंह
22:35
July 10, 2021
88. Asfaq Ulla Khan Ka Desh Wasiyon ke Naam Sandesh/ अशफाक उल्ला खान का देश वासियों के नाम संदेश
अशफाक उल्ला खान का देश वासियों के नाम संदेश Asfaq Ulla Khan Ka Desh Wasiyon ke Naam Sandesh/ 
06:07
July 09, 2021
87. Swarg Mein Vichar Shabha by Bhartendu Harish Chander/ (निबंध) स्वर्ग में विचार सभा का अधिवेशन - भारतेंदु हरिश्चंद्र
स्वर्ग में विचार सभा का अधिवेशन - भारतेंदु हरिश्चंद्र Swarg Mein Vichar Shabha by Bhartendu Harish Chander/
15:53
July 09, 2021
86. Sarkar Aur Aajadi by Ch. Chotu Ram / ( किसानी नजरिया ) सरकार और आजादी -चौ. छोटूराम
सरकार और आजादी -चौ. छोटूराम किसानों के नाम संदेश -चौ. छोटूराम चौधरी छोटूराम स्वतंत्रता से पहले किसान नेता व चिंतक-विचारक थे। किसानों को जागृत करने के लिए उन्होंने जाट-गजट नाम का उर्दू साप्ताहिक प्रकाशित किया। इसमें किसानों में व्याप्त बुराइयों, अंधविश्वास, पांखड, अज्ञानता को दूर करने के लिए तीखे लेख लिखे। किसानों का शोषण करने वाले महाजनों, पंडा-पुजारी वर्ग व शासकों को भी खरी खरी सुनाई। हिंदू-मुस्लिम एकता, धार्मिक सद्भाव व भाईचारे के चैंपियन थे। वे भारत-पाक विभाजन के खिलाफ थे। किसानों को संगठित होने व किसान आंदोलन को तीव्र करने के लिए अनेक कार्य किए. यहां उनके लेखों की शृंखला प्रस्तुत की जा रही है। ये लेख तत्कालीन ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को समेटे हुए हैं और आज भी प्रासंगिक हैं। उम्मीद है आपको पसंद आयेगी.  satyashadhak foundation यूट्यूब चैनल पर उनके विचारों को सुन सकते हैं। चौधरी छोटूराम का जीवन परिचय जन्म: 24 नवम्बर 1881, दिल्ली-रोहतक मार्ग पर गांव गढ़ी-सांपला, रोहतक (हरियाणा-तत्कालीन पंजाब सूबा) में       चौधरी सुखीराम एवं श्रीमती सिरयां देवी के घर। 1893 में झज्जर के गांव खेड़ी जट में चौधरी नान्हा राम की सुपुत्राी ज्ञानो देवी से 5 जून को बाल विवाह। शिक्षा: प्राइमरी सांपला से 1895 में झज्जर से 1899 में, मैट्रिक, एफए, बीए सेन्ट स्टीफेन कॉलेज दिल्ली से 1899-1905। कालाकांकर में राजा के पास नौकरी 1905-1909। आगरा से वकालत 1911, जाट स्कूल रोहतक की स्थापना 1913, जाट गजहट (उर्दू साप्ताहिक) 1916, रोहतक जिला कांग्र्रेस कमेटी के प्रथम अध्यक्ष 1916-1920, सर फजले हुसैन के साथ नेशनल यूनियनिस्ट पार्टी (जमींदार लोग) की स्थापना 1923, डायरकी में मंत्राी 1924-1926, लेजिस्लेटिव काउंसिल में विरोधी दल के नेता 1926-1935 व अध्यक्ष 1936, सर की उपाधि 1937, प्रोविन्सियल अटॉनमी में मंत्री 1937-1945, किसानों द्वारा रहबरे आजम की उपाधि से 6 अप्रैल 1944 को विभूषित, भाखड़ा बांध योजना पर हस्ताक्षर 8 जनवरी 1945। निधन: शक्ति भवन (निवास), लाहौर-9 जनवरी 1945। 1923 से 1944 के बीच किसानों के हित में कर्जा बिल, मंडी बिल, बेनामी एक्ट आदि सुनहरे कानूनों के बनाने में प्रमुख भूमिका। 1944 में मोहम्मद अली जिन्ना की पंजाब में साम्प्रदायिक घुसपैठ से भरपूर टक्कर। एक मार्च 1942 को अपनी हीरक जयंती पर उन्होंने घोषणा की-‘मैं मजहब को राजनीति से दूर करके शोषित किसान वर्ग और उपेक्षित ग्रामीण समाज कीसेवा में अपना जीवन खपा रहा हूं।’ भारत विभाजन के घोर विरोधी रहे। 15 अगस्त 1944 को विभाजन के राजाजी फॉर्मुले के खिलाफ गांधी जी को ऐतिहासिक पत्र लिखा।
15:53
July 08, 2021
85. Angreji Raj Ke Do Pahloo by Ch. Chotu Ram /( किसानी नजरिया ) अंग्रेजी राज के दो पहलू -चौ. छोटूराम
अंग्रेजी राज के दो पहलू -चौ. छोटूराम किसानों के नाम संदेश -चौ. छोटूराम चौधरी छोटूराम स्वतंत्रता से पहले किसान नेता व चिंतक-विचारक थे। किसानों को जागृत करने के लिए उन्होंने जाट-गजट नाम का उर्दू साप्ताहिक प्रकाशित किया। इसमें किसानों में व्याप्त बुराइयों, अंधविश्वास, पांखड, अज्ञानता को दूर करने के लिए तीखे लेख लिखे। किसानों का शोषण करने वाले महाजनों, पंडा-पुजारी वर्ग व शासकों को भी खरी खरी सुनाई। हिंदू-मुस्लिम एकता, धार्मिक सद्भाव व भाईचारे के चैंपियन थे। वे भारत-पाक विभाजन के खिलाफ थे। किसानों को संगठित होने व किसान आंदोलन को तीव्र करने के लिए अनेक कार्य किए. यहां उनके लेखों की शृंखला प्रस्तुत की जा रही है। ये लेख तत्कालीन ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को समेटे हुए हैं और आज भी प्रासंगिक हैं। उम्मीद है आपको पसंद आयेगी.  satyashadhak foundation यूट्यूब चैनल पर उनके विचारों को सुन सकते हैं। चौधरी छोटूराम का जीवन परिचय जन्म: 24 नवम्बर 1881, दिल्ली-रोहतक मार्ग पर गांव गढ़ी-सांपला, रोहतक (हरियाणा-तत्कालीन पंजाब सूबा) में       चौधरी सुखीराम एवं श्रीमती सिरयां देवी के घर। 1893 में झज्जर के गांव खेड़ी जट में चौधरी नान्हा राम की सुपुत्राी ज्ञानो देवी से 5 जून को बाल विवाह। शिक्षा: प्राइमरी सांपला से 1895 में झज्जर से 1899 में, मैट्रिक, एफए, बीए सेन्ट स्टीफेन कॉलेज दिल्ली से 1899-1905। कालाकांकर में राजा के पास नौकरी 1905-1909। आगरा से वकालत 1911, जाट स्कूल रोहतक की स्थापना 1913, जाट गजहट (उर्दू साप्ताहिक) 1916, रोहतक जिला कांग्र्रेस कमेटी के प्रथम अध्यक्ष 1916-1920, सर फजले हुसैन के साथ नेशनल यूनियनिस्ट पार्टी (जमींदार लोग) की स्थापना 1923, डायरकी में मंत्राी 1924-1926, लेजिस्लेटिव काउंसिल में विरोधी दल के नेता 1926-1935 व अध्यक्ष 1936, सर की उपाधि 1937, प्रोविन्सियल अटॉनमी में मंत्री 1937-1945, किसानों द्वारा रहबरे आजम की उपाधि से 6 अप्रैल 1944 को विभूषित, भाखड़ा बांध योजना पर हस्ताक्षर 8 जनवरी 1945। निधन: शक्ति भवन (निवास), लाहौर-9 जनवरी 1945। 1923 से 1944 के बीच किसानों के हित में कर्जा बिल, मंडी बिल, बेनामी एक्ट आदि सुनहरे कानूनों के बनाने में प्रमुख भूमिका। 1944 में मोहम्मद अली जिन्ना की पंजाब में साम्प्रदायिक घुसपैठ से भरपूर टक्कर। एक मार्च 1942 को अपनी हीरक जयंती पर उन्होंने घोषणा की-‘मैं मजहब को राजनीति से दूर करके शोषित किसान वर्ग और उपेक्षित ग्रामीण समाज कीसेवा में अपना जीवन खपा रहा हूं।’ भारत विभाजन के घोर विरोधी रहे। 15 अगस्त 1944 को विभाजन के राजाजी फॉर्मुले के खिलाफ गांधी जी को ऐतिहासिक पत्र लिखा।
16:06
July 08, 2021
84. Char Chor (लोक कथा) चार चोर
Char Chor (लोक कथा) चार चोर 
05:34
July 07, 2021
83.Punjab Ke Kisan Ka Bhavishya by Ch. Chotu Ram /( किसानी नजरिया ) पंजाब के किसान का भविष्य - चौ. छोटू राम
पंजाब के किसान का भविष्य - चौ. छोटू राम किसानों के नाम संदेश -चौ. छोटूराम चौधरी छोटूराम स्वतंत्रता से पहले किसान नेता व चिंतक-विचारक थे। किसानों को जागृत करने के लिए उन्होंने जाट-गजट नाम का उर्दू साप्ताहिक प्रकाशित किया। इसमें किसानों में व्याप्त बुराइयों, अंधविश्वास, पांखड, अज्ञानता को दूर करने के लिए तीखे लेख लिखे। किसानों का शोषण करने वाले महाजनों, पंडा-पुजारी वर्ग व शासकों को भी खरी खरी सुनाई। हिंदू-मुस्लिम एकता, धार्मिक सद्भाव व भाईचारे के चैंपियन थे। वे भारत-पाक विभाजन के खिलाफ थे। किसानों को संगठित होने व किसान आंदोलन को तीव्र करने के लिए अनेक कार्य किए. यहां उनके लेखों की शृंखला प्रस्तुत की जा रही है। ये लेख तत्कालीन ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को समेटे हुए हैं और आज भी प्रासंगिक हैं। उम्मीद है आपको पसंद आयेगी.  satyashadhak foundation यूट्यूब चैनल पर उनके विचारों को सुन सकते हैं। चौधरी छोटूराम का जीवन परिचय जन्म: 24 नवम्बर 1881, दिल्ली-रोहतक मार्ग पर गांव गढ़ी-सांपला, रोहतक (हरियाणा-तत्कालीन पंजाब सूबा) में       चौधरी सुखीराम एवं श्रीमती सिरयां देवी के घर। 1893 में झज्जर के गांव खेड़ी जट में चौधरी नान्हा राम की सुपुत्राी ज्ञानो देवी से 5 जून को बाल विवाह। शिक्षा: प्राइमरी सांपला से 1895 में झज्जर से 1899 में, मैट्रिक, एफए, बीए सेन्ट स्टीफेन कॉलेज दिल्ली से 1899-1905। कालाकांकर में राजा के पास नौकरी 1905-1909। आगरा से वकालत 1911, जाट स्कूल रोहतक की स्थापना 1913, जाट गजहट (उर्दू साप्ताहिक) 1916, रोहतक जिला कांग्र्रेस कमेटी के प्रथम अध्यक्ष 1916-1920, सर फजले हुसैन के साथ नेशनल यूनियनिस्ट पार्टी (जमींदार लोग) की स्थापना 1923, डायरकी में मंत्राी 1924-1926, लेजिस्लेटिव काउंसिल में विरोधी दल के नेता 1926-1935 व अध्यक्ष 1936, सर की उपाधि 1937, प्रोविन्सियल अटॉनमी में मंत्री 1937-1945, किसानों द्वारा रहबरे आजम की उपाधि से 6 अप्रैल 1944 को विभूषित, भाखड़ा बांध योजना पर हस्ताक्षर 8 जनवरी 1945। निधन: शक्ति भवन (निवास), लाहौर-9 जनवरी 1945। 1923 से 1944 के बीच किसानों के हित में कर्जा बिल, मंडी बिल, बेनामी एक्ट आदि सुनहरे कानूनों के बनाने में प्रमुख भूमिका। 1944 में मोहम्मद अली जिन्ना की पंजाब में साम्प्रदायिक घुसपैठ से भरपूर टक्कर। एक मार्च 1942 को अपनी हीरक जयंती पर उन्होंने घोषणा की-‘मैं मजहब को राजनीति से दूर करके शोषित किसान वर्ग और उपेक्षित ग्रामीण समाज कीसेवा में अपना जीवन खपा रहा हूं।’ भारत विभाजन के घोर विरोधी रहे। 15 अगस्त 1944 को विभाजन के राजाजी फॉर्मुले के खिलाफ गांधी जी को ऐतिहासिक पत्र लिखा।
17:59
July 06, 2021
82. Pagdandiyon Ka Jamama by Harishankar Parsai/ (व्यंग्य) पगडण्डियों का जमाना - हरिशंकर परसाई
(व्यंग्य) पगडण्डियों का जमाना - हरिशंकर परसाई
14:37
July 06, 2021
81. Nakhun Kyon Badhte Hain by Aacharya Hajari Prasad Diwedi / (निबंध) नाखून क्यों बढ़ते हैं - आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
नाखून क्यों बढ़ते हैं  - आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
19:22
July 05, 2021
81. Afro-Asia Writer Association - Faiz Ahmad Faiz ( भाषण) अफ्रो एशियाई लेखक संघ में भाषण - फैज अहमद फैज़
Afro-Asia Writer Association - Faiz Ahmad Faiz ( भाषण) अफ्रो एशियाई लेखक संघ में भाषण - फैज़ अहमद फैज़ रूस में 1983 में  अफ्रो एशियाई लेखक संघ के रजत जयंती के अवसर पर दिया गया क्रांतिकारी शायर फैज अहमद फैज का भाषण. Speech by Revolutionary Poet Faiz Ahmad Faiz in 1983 on the occasion of Silver jubilee function of Afro-Asiatic Writer Association. In this He discuss international  political situation and issues and duties of writers in this senerio. 
25:02
July 03, 2021
80. Sahitya, Sanskriti Aur ShaShan by Maha Devi Verma ( भाषण) साहित्य, संस्कृति और शासन - महादेवी वर्मा
Sahitya, Sanskriti Aur ShaShan by Maha Devi Verma ( भाषण) साहित्य, संस्कृति और शासन - महादेवी वर्मा The lecture giveb by Great Hindi Writer Maha Devi Verma in Assembly Council of U.P. on Literature, Culture and Government.She Spoke only physical development is not sufficient moral and mental development of society should taken care of by the Govt. These should be part and partial  developmental plan. 
17:41
July 02, 2021
79. Kisan Ka Dukhda by Ch. Chotu Ram/( किसानी नजरिया ) किसान का दुखड़ा - चौ. छोटू राम
किसान का दुखड़ा - चौ. छोटू राम किसानों के नाम संदेश -चौ. छोटूराम चौधरी छोटूराम स्वतंत्रता से पहले किसान नेता व चिंतक-विचारक थे। किसानों को जागृत करने के लिए उन्होंने जाट-गजट नाम का उर्दू साप्ताहिक प्रकाशित किया। इसमें किसानों में व्याप्त बुराइयों, अंधविश्वास, पांखड, अज्ञानता को दूर करने के लिए तीखे लेख लिखे। किसानों का शोषण करने वाले महाजनों, पंडा-पुजारी वर्ग व शासकों को भी खरी खरी सुनाई। हिंदू-मुस्लिम एकता, धार्मिक सद्भाव व भाईचारे के चैंपियन थे। वे भारत-पाक विभाजन के खिलाफ थे। किसानों को संगठित होने व किसान आंदोलन को तीव्र करने के लिए अनेक कार्य किए. यहां उनके लेखों की शृंखला प्रस्तुत की जा रही है। ये लेख तत्कालीन ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को समेटे हुए हैं और आज भी प्रासंगिक हैं। उम्मीद है आपको पसंद आयेगी.  satyashadhak foundation यूट्यूब चैनल पर उनके विचारों को सुन सकते हैं। चौधरी छोटूराम का जीवन परिचय जन्म: 24 नवम्बर 1881, दिल्ली-रोहतक मार्ग पर गांव गढ़ी-सांपला, रोहतक (हरियाणा-तत्कालीन पंजाब सूबा) में       चौधरी सुखीराम एवं श्रीमती सिरयां देवी के घर। 1893 में झज्जर के गांव खेड़ी जट में चौधरी नान्हा राम की सुपुत्राी ज्ञानो देवी से 5 जून को बाल विवाह। शिक्षा: प्राइमरी सांपला से 1895 में झज्जर से 1899 में, मैट्रिक, एफए, बीए सेन्ट स्टीफेन कॉलेज दिल्ली से 1899-1905। कालाकांकर में राजा के पास नौकरी 1905-1909। आगरा से वकालत 1911, जाट स्कूल रोहतक की स्थापना 1913, जाट गजहट (उर्दू साप्ताहिक) 1916, रोहतक जिला कांग्र्रेस कमेटी के प्रथम अध्यक्ष 1916-1920, सर फजले हुसैन के साथ नेशनल यूनियनिस्ट पार्टी (जमींदार लोग) की स्थापना 1923, डायरकी में मंत्राी 1924-1926, लेजिस्लेटिव काउंसिल में विरोधी दल के नेता 1926-1935 व अध्यक्ष 1936, सर की उपाधि 1937, प्रोविन्सियल अटॉनमी में मंत्री 1937-1945, किसानों द्वारा रहबरे आजम की उपाधि से 6 अप्रैल 1944 को विभूषित, भाखड़ा बांध योजना पर हस्ताक्षर 8 जनवरी 1945। निधन: शक्ति भवन (निवास), लाहौर-9 जनवरी 1945। 1923 से 1944 के बीच किसानों के हित में कर्जा बिल, मंडी बिल, बेनामी एक्ट आदि सुनहरे कानूनों के बनाने में प्रमुख भूमिका। 1944 में मोहम्मद अली जिन्ना की पंजाब में साम्प्रदायिक घुसपैठ से भरपूर टक्कर। एक मार्च 1942 को अपनी हीरक जयंती पर उन्होंने घोषणा की-‘मैं मजहब को राजनीति से दूर करके शोषित किसान वर्ग और उपेक्षित ग्रामीण समाज कीसेवा में अपना जीवन खपा रहा हूं।’ भारत विभाजन के घोर विरोधी रहे। 15 अगस्त 1944 को विभाजन के राजाजी फॉर्मुले के खिलाफ गांधी जी को ऐतिहासिक पत्र लिखा।
17:32
July 01, 2021
78. Sharion Ke Chonchle by Ch. Chotu Ram (किसानी नजरिया ) शहरियों के चोंचले - चौ. छोटूराम
शहरियों के चोंचले - चौ. छोटूराम किसानों के नाम संदेश -चौ. छोटूराम चौधरी छोटूराम स्वतंत्रता से पहले किसान नेता व चिंतक-विचारक थे। किसानों को जागृत करने के लिए उन्होंने जाट-गजट नाम का उर्दू साप्ताहिक प्रकाशित किया। इसमें किसानों में व्याप्त बुराइयों, अंधविश्वास, पांखड, अज्ञानता को दूर करने के लिए तीखे लेख लिखे। किसानों का शोषण करने वाले महाजनों, पंडा-पुजारी वर्ग व शासकों को भी खरी खरी सुनाई। हिंदू-मुस्लिम एकता, धार्मिक सद्भाव व भाईचारे के चैंपियन थे। वे भारत-पाक विभाजन के खिलाफ थे। किसानों को संगठित होने व किसान आंदोलन को तीव्र करने के लिए अनेक कार्य किए. यहां उनके लेखों की शृंखला प्रस्तुत की जा रही है। ये लेख तत्कालीन ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को समेटे हुए हैं और आज भी प्रासंगिक हैं। उम्मीद है आपको पसंद आयेगी.  satyashadhak foundation यूट्यूब चैनल पर उनके विचारों को सुन सकते हैं। चौधरी छोटूराम का जीवन परिचय जन्म: 24 नवम्बर 1881, दिल्ली-रोहतक मार्ग पर गांव गढ़ी-सांपला, रोहतक (हरियाणा-तत्कालीन पंजाब सूबा) में       चौधरी सुखीराम एवं श्रीमती सिरयां देवी के घर। 1893 में झज्जर के गांव खेड़ी जट में चौधरी नान्हा राम की सुपुत्राी ज्ञानो देवी से 5 जून को बाल विवाह। शिक्षा: प्राइमरी सांपला से 1895 में झज्जर से 1899 में, मैट्रिक, एफए, बीए सेन्ट स्टीफेन कॉलेज दिल्ली से 1899-1905। कालाकांकर में राजा के पास नौकरी 1905-1909। आगरा से वकालत 1911, जाट स्कूल रोहतक की स्थापना 1913, जाट गजहट (उर्दू साप्ताहिक) 1916, रोहतक जिला कांग्र्रेस कमेटी के प्रथम अध्यक्ष 1916-1920, सर फजले हुसैन के साथ नेशनल यूनियनिस्ट पार्टी (जमींदार लोग) की स्थापना 1923, डायरकी में मंत्राी 1924-1926, लेजिस्लेटिव काउंसिल में विरोधी दल के नेता 1926-1935 व अध्यक्ष 1936, सर की उपाधि 1937, प्रोविन्सियल अटॉनमी में मंत्री 1937-1945, किसानों द्वारा रहबरे आजम की उपाधि से 6 अप्रैल 1944 को विभूषित, भाखड़ा बांध योजना पर हस्ताक्षर 8 जनवरी 1945। निधन: शक्ति भवन (निवास), लाहौर-9 जनवरी 1945। 1923 से 1944 के बीच किसानों के हित में कर्जा बिल, मंडी बिल, बेनामी एक्ट आदि सुनहरे कानूनों के बनाने में प्रमुख भूमिका। 1944 में मोहम्मद अली जिन्ना की पंजाब में साम्प्रदायिक घुसपैठ से भरपूर टक्कर। एक मार्च 1942 को अपनी हीरक जयंती पर उन्होंने घोषणा की-‘मैं मजहब को राजनीति से दूर करके शोषित किसान वर्ग और उपेक्षित ग्रामीण समाज कीसेवा में अपना जीवन खपा रहा हूं।’ भारत विभाजन के घोर विरोधी रहे। 15 अगस्त 1944 को विभाजन के राजाजी फॉर्मुले के खिलाफ गांधी जी को ऐतिहासिक पत्र लिखा।
20:56
July 01, 2021
77. Poos Ki Raat by Premchand/ (कहानी) पूस की रात - प्रेमचंद
Poos Ki Raat by Premchand/ (कहानी) पूस की रात - प्रेमचंद  पूस की रात कहानी में भारतीय किसान के चहुंमुखी शोषण का चित्रण ह। पूंजीवादी व्यवस्था के घोर शोषण से छोटा किसान किस तरह मजदूर में तब्दील होता जाता है इस प्रक्रिया को बेहतरी से उदघाटित करती है। Pus Ki Raat is a short story written by Premchand.This story depicts the all-round exploitation of the Indian farmer. It best exposes the process of how a small farmer is transformed into a laborer by the gross exploitation of the capitalist system.
18:08
June 30, 2021
76. Wakti Judai KA Daur/(संस्मरण) वक्ती जुदाई का दौर - कृश्न चंदर
1967 में रूस में फैज़ अहमद फैज़ के साथ मुलाकात पर आधारित। भारत-पाक दोस्ती व भारत-पाक जनता के बीच मौजूद प्रेम व भाईचारे को उभारता हुआ। सत्ताधीश अपना राजनीतिक उल्लू सीधा करने के लिए दोनों देशों के बीच नफरत फैलाकर युद्धों में झोंकते रहे हैं, लेकिन जनता ऐसा नहीं चाहती।  लेखक को उम्मीद है कि नफरत की यह कृत्रिम दीवार एक दिन ढह जाएगी.
14:53
June 29, 2021
75. Kissanon Ke Naam Sandesh/ (किसानी नजरिया ) किसानों के नाम संदेश -चौ. छोटूराम
किसानों के नाम संदेश -चौ. छोटूराम चौधरी छोटूराम स्वतंत्रता से पहले किसान नेता व चिंतक-विचारक थे। किसानों को जागृत करने के लिए उन्होंने जाट-गजट नाम का उर्दू साप्ताहिक प्रकाशित किया। इसमें किसानों में व्याप्त बुराइयों, अंधविश्वास, पांखड, अज्ञानता को दूर करने के लिए तीखे लेख लिखे। किसानों का शोषण करने वाले महाजनों, पंडा-पुजारी वर्ग व शासकों को भी खरी खरी सुनाई। हिंदू-मुस्लिम एकता, धार्मिक सद्भाव व भाईचारे के चैंपियन थे। वे भारत-पाक विभाजन के खिलाफ थे। किसानों को संगठित होने व किसान आंदोलन को तीव्र करने के लिए अनेक कार्य किए. यहां उनके लेखों की शृंखला प्रस्तुत की जा रही है। ये लेख तत्कालीन ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को समेटे हुए हैं और आज भी प्रासंगिक हैं। उम्मीद है आपको पसंद आयेगी.  satyashadhak foundation यूट्यूब चैनल पर उनके विचारों को सुन सकते हैं।    चौधरी छोटूराम का जीवन परिचय   जन्म: 24 नवम्बर 1881, दिल्ली-रोहतक मार्ग पर गांव गढ़ी-सांपला, रोहतक (हरियाणा-तत्कालीन पंजाब सूबा) में       चौधरी सुखीराम एवं श्रीमती सिरयां देवी के घर। 1893 में झज्जर के गांव खेड़ी जट में चौधरी नान्हा राम की सुपुत्राी ज्ञानो देवी से 5 जून को बाल विवाह। शिक्षा: प्राइमरी सांपला से 1895 में झज्जर से 1899 में, मैट्रिक, एफए, बीए सेन्ट स्टीफेन कॉलेज दिल्ली से 1899-1905। कालाकांकर में राजा के पास नौकरी 1905-1909। आगरा से वकालत 1911, जाट स्कूल रोहतक की स्थापना 1913, जाट गजहट (उर्दू साप्ताहिक) 1916, रोहतक जिला कांग्र्रेस कमेटी के प्रथम अध्यक्ष 1916-1920, सर फजले हुसैन के साथ नेशनल यूनियनिस्ट पार्टी (जमींदार लोग) की स्थापना 1923, डायरकी में मंत्राी 1924-1926, लेजिस्लेटिव काउंसिल में विरोधी दल के नेता 1926-1935 व अध्यक्ष 1936, सर की उपाधि 1937, प्रोविन्सियल अटॉनमी में मंत्री 1937-1945, किसानों द्वारा रहबरे आजम की उपाधि से 6 अप्रैल 1944 को विभूषित, भाखड़ा बांध योजना पर हस्ताक्षर 8 जनवरी 1945। निधन: शक्ति भवन (निवास), लाहौर-9 जनवरी 1945। 1923 से 1944 के बीच किसानों के हित में कर्जा बिल, मंडी बिल, बेनामी एक्ट आदि सुनहरे कानूनों के बनाने में प्रमुख भूमिका। 1944 में मोहम्मद अली जिन्ना की पंजाब में साम्प्रदायिक घुसपैठ से भरपूर टक्कर। एक मार्च 1942 को अपनी हीरक जयंती पर उन्होंने घोषणा की-‘मैं मजहब को राजनीति से दूर करके शोषित किसान वर्ग और उपेक्षित ग्रामीण समाज कीसेवा में अपना जीवन खपा रहा हूं।’ भारत विभाजन के घोर विरोधी रहे। 15 अगस्त 1944 को विभाजन के राजाजी फॉर्मुले के खिलाफ गांधी जी को ऐतिहासिक पत्र लिखा।
12:50
June 27, 2021
74.Dukhi Jeewan/ (निबंध) दुखी जीवन - प्रेमचंद
दुखी जीवन - प्रेमचंद
19:36
June 26, 2021
73. Sahitya Ka Aadhar (निबंध) साहित्य का आधार - प्रेमचंद
(निबंध) साहित्य का आधार - प्रेमचंद
14:49
June 26, 2021
72. Bachhon Ko Swadheen Banao ( निबंध ) बच्चों को स्वाधीन बनाओ - प्रेमचंद
बच्चों को स्वाधीन बनाओ - प्रेमचंद
14:22
June 26, 2021
71. Kagjee Hakumat ( किसानी नजरिया ) कागजी हुकुमत -चौ. छोटूराम
चौधरी छोटू राम, अनुवाद-हरि सिंह किसान नेता चौधरी छोटूराम का लेख। वे जाट गजट अखबार प्रकाशित करते थे। किसानों को जागृत करने के लिए अनेक कदम उठाए। किसान आंदोलन उनके ऋणी रहेंगे। किसान राजनीति की उन्होंने शुरुआत की थी। हिंदू-मुस्लिम एकता व सांप्रदायिक सदभाव के कार्य किया। भारत-विभाजन के वे खिलाफ थे। जी चाहता है कि शिमला की ऊंची पहाड़ियों पर रहने वाले सरकारी अफसरों को और लाहौर की ठंडी सड़क और सुंदर पार्कों और बागों में मटर गश्ती व सैर-सपाटा करने वाले शहरी हजरात को किसी तरह यह विश्वास दिलाऊं कि आबादी का एक वर्ग ऐसा भी है, जिसको नाने-शबीना (एक वक्त की रोटी) भी नहीं मिलती है। जो तुम्हारे लिए विलासिता का सामान जुटाता है, वह स्वयं तंग-दस्त और फाका-मस्त है। बेचारा किसान निढाल है, खस्ताहाल है। इसकी गरीबी की यह हालत है कि इसको सरकारी तकाजों को भी पूरा करना दूभर हो जाता है। मगर इसकी बेकसी का सही ज्ञान बहुत कम लोगों को है। हमारी सरकार ने अभी हाल में जिले के अफसरों से चंद सवालात पूछे थे। इनमें से एक सवाल यह था कि क्या सचमुच किसान के सब साधन जवाब दे चुके हैं? हमारी कैसी नन्ही-मुन्नी भोली सरकार है, जिसको अब तक यह पता नहीं कि किसान के आर्थिक जीवन के सब चश्मे सूख चुके हैं! मगर पता भी कैसे लगे? कागजी हुकूमत है। कागजी घोड़े दौड़ते हैं। कागज का पेट भर दिया जाता है। बस सरकार की तसल्ली हो जाती है। प्रजा का पेट भरा है या नहीं, कागजी घुड़दौड़ में किसी को ध्यान ही नहीं आता। सरकारी अफसरों को केवल कागजों में दर्ज हुई बातों का ही पता होता है। रियाया पर क्या गुजरती है, प्रजा खुशहाल है या बदहाल है, इसका हाल केवल देहात वालों को ही मालूम है। पटवारी को भी मालूम है, लेकिन यह कहने से डरता है। ज्यों-ज्यों ऊपर जाओ, हालात की सही जानकारी कम होती जाती है। यहां तक कि सरकार के बड़े-बड़े दफ्तरों तक पहुंचते-पहुंचते केवल कागजी इंदराजात और कागजी औसत पर ही निर्भर किया जाता है। सच तो यह है कि बड़े अफसरों को सही हालात मालूम होने बड़े कठिन हैं। जो बड़े-बड़े अफसर हैं, उनको तो पुलिस की रिपोर्टों और प्राइवेट चुगलखोरों की बातें सुनने से फुरसत नहीं मिलती। इनका अधिक समय राजनैतिक स्थिति का अध्ययन करने और उनसे संबंधित रिपोर्ट भेजने में खर्च हो जाता है। इलाकों में दौरा करने, प्रजा से मिलने-जुलने, सही जानकारी देने और अपनी आंख से सब चीजों को देखने का इनको मौका ही नहीं मिलता।
12:08
June 25, 2021
70. Swasthya Aur Shiksha (निबंध) स्वास्थ्य और शिक्षा - प्रेमचंद
(निबंध) स्वास्थ्य और शिक्षा - प्रेमचंद
12:19
June 24, 2021
69. Sampradayikta Aur Sanskriti - Premchand/(निबंध) सांप्रदायिकता और संस्कृति - प्रेमचंद
सांप्रदायिकता और संस्कृति - प्रेमचंद
12:54
June 24, 2021
68.Bolna Seekh - Ch. Chotu Ram/( किसानी नजरिया ) बोलना सीख - चौ. छोटू राम
Bolna Seekh - Ch. Chotu Ram/ बोलना सीख - चौ. छोटू राम  चौ. छोटूराम चौधरी छोटूराम स्वतंत्रता से पहले किसान नेता व चिंतक-विचारक थे। किसानों को जागृत करने के लिए उन्होंने जाट-गजट नाम का उर्दू साप्ताहिक प्रकाशित किया। इसमें किसानों में व्याप्त बुराइयों, अंधविश्वास, पांखड, अज्ञानता को दूर करने के लिए तीखे लेख लिखे। किसानों का शोषण करने वाले महाजनों, पंडा-पुजारी वर्ग व शासकों को भी खरी खरी सुनाई। हिंदू-मुस्लिम एकता, धार्मिक सद्भाव व भाईचारे के चैंपियन थे। वे भारत-पाक विभाजन के खिलाफ थे। किसानों को संगठित होने व किसान आंदोलन को तीव्र करने के लिए अनेक कार्य किए. यहां उनके लेखों की शृंखला प्रस्तुत की जा रही है। ये लेख तत्कालीन ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को समेटे हुए हैं और आज भी प्रासंगिक हैं। उम्मीद है आपको पसंद आयेगी.  satyashadhak foundation यूट्यूब चैनल पर उनके विचारों को सुन सकते हैं।  चौधरी छोटूराम का जीवन परिचय जन्म: 24 नवम्बर 1881, दिल्ली-रोहतक मार्ग पर गांव गढ़ी-सांपला, रोहतक (हरियाणा-तत्कालीन पंजाब सूबा) में  चौधरी सुखीराम एवं श्रीमती सिरयां देवी के घर। 1893 में झज्जर के गांव खेड़ी जट में चौधरी नान्हा राम की सुपुत्राी ज्ञानो देवी से 5 जून को बाल विवाह। शिक्षा: प्राइमरी सांपला से 1895 में झज्जर से 1899 में, मैट्रिक, एफए, बीए सेन्ट स्टीफेन कॉलेज दिल्ली से 1899-1905। कालाकांकर में राजा के पास नौकरी 1905-1909। आगरा से वकालत 1911, जाट स्कूल रोहतक की स्थापना 1913, जाट गजहट (उर्दू साप्ताहिक) 1916, रोहतक जिला कांग्र्रेस कमेटी के प्रथम अध्यक्ष 1916-1920, सर फजले हुसैन के साथ नेशनल यूनियनिस्ट पार्टी (जमींदार लोग) की स्थापना 1923, डायरकी में मंत्राी 1924-1926, लेजिस्लेटिव काउंसिल में विरोधी दल के नेता 1926-1935 व अध्यक्ष 1936, सर की उपाधि 1937, प्रोविन्सियल अटॉनमी में मंत्री 1937-1945, किसानों द्वारा रहबरे आजम की उपाधि से 6 अप्रैल 1944 को विभूषित, भाखड़ा बांध योजना पर हस्ताक्षर 8 जनवरी 1945।  निधन: शक्ति भवन (निवास), लाहौर-9 जनवरी 1945.  1923 से 1944 के बीच किसानों के हित में कर्जा बिल, मंडी बिल, बेनामी एक्ट आदि सुनहरे कानूनों के बनाने में प्रमुख भूमिका। 1944 में मोहम्मद अली जिन्ना की पंजाब में साम्प्रदायिक घुसपैठ से भरपूर टक्कर। एक मार्च 1942 को अपनी हीरक जयंती पर उन्होंने घोषणा की-‘मैं मजहब को राजनीति से दूर करके शोषित किसान वर्ग और उपेक्षित ग्रामीण समाज कीसेवा में अपना जीवन खपा रहा हूं।’ भारत विभाजन के घोर विरोधी रहे। 15 अगस्त 1944 को विभाजन के राजाजी फॉर्मुले के खिलाफ गांधी जी को ऐतिहासिक पत्र लिखा।
18:13
June 24, 2021
67. ( किसानी नजरिया ) नया उपदेश - चौ. छोटू राम
नया उपदेश - चौ. छोटू राम किसानों के नाम संदेश -चौ. छोटूराम चौधरी छोटूराम स्वतंत्रता से पहले किसान नेता व चिंतक-विचारक थे। किसानों को जागृत करने के लिए उन्होंने जाट-गजट नाम का उर्दू साप्ताहिक प्रकाशित किया। इसमें किसानों में व्याप्त बुराइयों, अंधविश्वास, पांखड, अज्ञानता को दूर करने के लिए तीखे लेख लिखे। किसानों का शोषण करने वाले महाजनों, पंडा-पुजारी वर्ग व शासकों को भी खरी खरी सुनाई। हिंदू-मुस्लिम एकता, धार्मिक सद्भाव व भाईचारे के चैंपियन थे। वे भारत-पाक विभाजन के खिलाफ थे। किसानों को संगठित होने व किसान आंदोलन को तीव्र करने के लिए अनेक कार्य किए. यहां उनके लेखों की शृंखला प्रस्तुत की जा रही है। ये लेख तत्कालीन ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को समेटे हुए हैं और आज भी प्रासंगिक हैं। उम्मीद है आपको पसंद आयेगी.  satyashadhak foundation यूट्यूब चैनल पर उनके विचारों को सुन सकते हैं। चौधरी छोटूराम का जीवन परिचय जन्म: 24 नवम्बर 1881, दिल्ली-रोहतक मार्ग पर गांव गढ़ी-सांपला, रोहतक (हरियाणा-तत्कालीन पंजाब सूबा) में       चौधरी सुखीराम एवं श्रीमती सिरयां देवी के घर। 1893 में झज्जर के गांव खेड़ी जट में चौधरी नान्हा राम की सुपुत्राी ज्ञानो देवी से 5 जून को बाल विवाह। शिक्षा: प्राइमरी सांपला से 1895 में झज्जर से 1899 में, मैट्रिक, एफए, बीए सेन्ट स्टीफेन कॉलेज दिल्ली से 1899-1905। कालाकांकर में राजा के पास नौकरी 1905-1909। आगरा से वकालत 1911, जाट स्कूल रोहतक की स्थापना 1913, जाट गजहट (उर्दू साप्ताहिक) 1916, रोहतक जिला कांग्र्रेस कमेटी के प्रथम अध्यक्ष 1916-1920, सर फजले हुसैन के साथ नेशनल यूनियनिस्ट पार्टी (जमींदार लोग) की स्थापना 1923, डायरकी में मंत्राी 1924-1926, लेजिस्लेटिव काउंसिल में विरोधी दल के नेता 1926-1935 व अध्यक्ष 1936, सर की उपाधि 1937, प्रोविन्सियल अटॉनमी में मंत्री 1937-1945, किसानों द्वारा रहबरे आजम की उपाधि से 6 अप्रैल 1944 को विभूषित, भाखड़ा बांध योजना पर हस्ताक्षर 8 जनवरी 1945। निधन: शक्ति भवन (निवास), लाहौर-9 जनवरी 1945। 1923 से 1944 के बीच किसानों के हित में कर्जा बिल, मंडी बिल, बेनामी एक्ट आदि सुनहरे कानूनों के बनाने में प्रमुख भूमिका। 1944 में मोहम्मद अली जिन्ना की पंजाब में साम्प्रदायिक घुसपैठ से भरपूर टक्कर। एक मार्च 1942 को अपनी हीरक जयंती पर उन्होंने घोषणा की-‘मैं मजहब को राजनीति से दूर करके शोषित किसान वर्ग और उपेक्षित ग्रामीण समाज कीसेवा में अपना जीवन खपा रहा हूं।’ भारत विभाजन के घोर विरोधी रहे। 15 अगस्त 1944 को विभाजन के राजाजी फॉर्मुले के खिलाफ गांधी जी को ऐतिहासिक पत्र लिखा।
12:16
June 23, 2021
66. ( किसानी नजरिया ) जिंदगी का मरकज़ -चौ. छोटूराम
जिंदगी का मरकज़ -चौ. छोटूराम किसानों के नाम संदेश -चौ. छोटूराम चौधरी छोटूराम स्वतंत्रता से पहले किसान नेता व चिंतक-विचारक थे। किसानों को जागृत करने के लिए उन्होंने जाट-गजट नाम का उर्दू साप्ताहिक प्रकाशित किया। इसमें किसानों में व्याप्त बुराइयों, अंधविश्वास, पांखड, अज्ञानता को दूर करने के लिए तीखे लेख लिखे। किसानों का शोषण करने वाले महाजनों, पंडा-पुजारी वर्ग व शासकों को भी खरी खरी सुनाई। हिंदू-मुस्लिम एकता, धार्मिक सद्भाव व भाईचारे के चैंपियन थे। वे भारत-पाक विभाजन के खिलाफ थे। किसानों को संगठित होने व किसान आंदोलन को तीव्र करने के लिए अनेक कार्य किए. यहां उनके लेखों की शृंखला प्रस्तुत की जा रही है। ये लेख तत्कालीन ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को समेटे हुए हैं और आज भी प्रासंगिक हैं। उम्मीद है आपको पसंद आयेगी.  satyashadhak foundation यूट्यूब चैनल पर उनके विचारों को सुन सकते हैं। चौधरी छोटूराम का जीवन परिचय जन्म: 24 नवम्बर 1881, दिल्ली-रोहतक मार्ग पर गांव गढ़ी-सांपला, रोहतक (हरियाणा-तत्कालीन पंजाब सूबा) में       चौधरी सुखीराम एवं श्रीमती सिरयां देवी के घर। 1893 में झज्जर के गांव खेड़ी जट में चौधरी नान्हा राम की सुपुत्राी ज्ञानो देवी से 5 जून को बाल विवाह। शिक्षा: प्राइमरी सांपला से 1895 में झज्जर से 1899 में, मैट्रिक, एफए, बीए सेन्ट स्टीफेन कॉलेज दिल्ली से 1899-1905। कालाकांकर में राजा के पास नौकरी 1905-1909। आगरा से वकालत 1911, जाट स्कूल रोहतक की स्थापना 1913, जाट गजहट (उर्दू साप्ताहिक) 1916, रोहतक जिला कांग्र्रेस कमेटी के प्रथम अध्यक्ष 1916-1920, सर फजले हुसैन के साथ नेशनल यूनियनिस्ट पार्टी (जमींदार लोग) की स्थापना 1923, डायरकी में मंत्राी 1924-1926, लेजिस्लेटिव काउंसिल में विरोधी दल के नेता 1926-1935 व अध्यक्ष 1936, सर की उपाधि 1937, प्रोविन्सियल अटॉनमी में मंत्री 1937-1945, किसानों द्वारा रहबरे आजम की उपाधि से 6 अप्रैल 1944 को विभूषित, भाखड़ा बांध योजना पर हस्ताक्षर 8 जनवरी 1945। निधन: शक्ति भवन (निवास), लाहौर-9 जनवरी 1945। 1923 से 1944 के बीच किसानों के हित में कर्जा बिल, मंडी बिल, बेनामी एक्ट आदि सुनहरे कानूनों के बनाने में प्रमुख भूमिका। 1944 में मोहम्मद अली जिन्ना की पंजाब में साम्प्रदायिक घुसपैठ से भरपूर टक्कर। एक मार्च 1942 को अपनी हीरक जयंती पर उन्होंने घोषणा की-‘मैं मजहब को राजनीति से दूर करके शोषित किसान वर्ग और उपेक्षित ग्रामीण समाज कीसेवा में अपना जीवन खपा रहा हूं।’ भारत विभाजन के घोर विरोधी रहे। 15 अगस्त 1944 को विभाजन के राजाजी फॉर्मुले के खिलाफ गांधी जी को ऐतिहासिक पत्र लिखा।
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June 22, 2021
65.( किसानी नजरिया ) भारत में मजहब - चौ. छोटूराम
भारत में मजहब - चौ. छोटूराम  चौ. छोटूराम चौधरी छोटूराम स्वतंत्रता से पहले किसान नेता व चिंतक-विचारक थे। किसानों को जागृत करने के लिए उन्होंने जाट-गजट नाम का उर्दू साप्ताहिक प्रकाशित किया। इसमें किसानों में व्याप्त बुराइयों, अंधविश्वास, पांखड, अज्ञानता को दूर करने के लिए तीखे लेख लिखे। किसानों का शोषण करने वाले महाजनों, पंडा-पुजारी वर्ग व शासकों को भी खरी खरी सुनाई। हिंदू-मुस्लिम एकता, धार्मिक सद्भाव व भाईचारे के चैंपियन थे। वे भारत-पाक विभाजन के खिलाफ थे। किसानों को संगठित होने व किसान आंदोलन को तीव्र करने के लिए अनेक कार्य किए. यहां उनके लेखों की शृंखला प्रस्तुत की जा रही है। ये लेख तत्कालीन ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को समेटे हुए हैं और आज भी प्रासंगिक हैं। उम्मीद है आपको पसंद आयेगी.  satyashadhak foundation यूट्यूब चैनल पर उनके विचारों को सुन सकते हैं।  चौधरी छोटूराम का जीवन परिचय  जन्म: 24 नवम्बर 1881, दिल्ली-रोहतक मार्ग पर गांव गढ़ी-सांपला, रोहतक (हरियाणा-तत्कालीन पंजाब सूबा) में चौधरी सुखीराम एवं श्रीमती सिरयां देवी के घर। 1893 में झज्जर के गांव खेड़ी जट में चौधरी नान्हा राम की सुपुत्राी ज्ञानो देवी से 5 जून को बाल विवाह। शिक्षा: प्राइमरी सांपला से 1895 में झज्जर से 1899 में, मैट्रिक, एफए, बीए सेन्ट स्टीफेन कॉलेज दिल्ली से 1899-1905। कालाकांकर में राजा के पास नौकरी 1905-1909। आगरा से वकालत 1911, जाट स्कूल रोहतक की स्थापना 1913, जाट गजहट (उर्दू साप्ताहिक) 1916, रोहतक जिला कांग्र्रेस कमेटी के प्रथम अध्यक्ष 1916-1920, सर फजले हुसैन के साथ नेशनल यूनियनिस्ट पार्टी (जमींदार लोग) की स्थापना 1923, डायरकी में मंत्राी 1924-1926, लेजिस्लेटिव काउंसिल में विरोधी दल के नेता 1926-1935 व अध्यक्ष 1936, सर की उपाधि 1937, प्रोविन्सियल अटॉनमी में मंत्री 1937-1945, किसानों द्वारा रहबरे आजम की उपाधि से 6 अप्रैल 1944 को विभूषित, भाखड़ा बांध योजना पर हस्ताक्षर 8 जनवरी 1945। निधन: शक्ति भवन (निवास), लाहौर-9 जनवरी 1945। 1923 से 1944 के बीच किसानों के हित में कर्जा बिल, मंडी बिल, बेनामी एक्ट आदि सुनहरे कानूनों के बनाने में प्रमुख भूमिका। 1944 में मोहम्मद अली जिन्ना की पंजाब में साम्प्रदायिक घुसपैठ से भरपूर टक्कर। एक मार्च 1942 को अपनी हीरक जयंती पर उन्होंने घोषणा की-‘मैं मजहब को राजनीति से दूर करके शोषित किसान वर्ग और उपेक्षित ग्रामीण समाज कीसेवा में अपना जीवन खपा रहा हूं।’ भारत विभाजन के घोर विरोधी रहे। 15 अगस्त 1944 को विभाजन के राजाजी फॉर्मुले के खिलाफ गांधी जी को ऐतिहासिक पत्र लिखा।
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June 22, 2021
64. ( किसानी नजरिया ) दुश्मन की पहचान - चौ. छोटू राम
दुश्मन की पहचान - चौ. छोटू राम चौधरी छोटूराम स्वतंत्रता से पहले किसान नेता व चिंतक-विचारक थे। किसानों को जागृत करने के लिए उन्होंने जाट-गजट नाम का उर्दू साप्ताहिक प्रकाशित किया। इसमें किसानों में व्याप्त बुराइयों, अंधविश्वास, पांखड, अज्ञानता को दूर करने के लिए तीखे लेख लिखे। किसानों का शोषण करने वाले महाजनों, पंडा-पुजारी वर्ग व शासकों को भी खरी खरी सुनाई। हिंदू-मुस्लिम एकता, धार्मिक सद्भाव व भाईचारे के चैंपियन थे। वे भारत-पाक विभाजन के खिलाफ थे। किसानों को संगठित होने व किसान आंदोलन को तीव्र करने के लिए अनेक कार्य किए. यहां उनके लेखों की शृंखला प्रस्तुत की जा रही है। ये लेख तत्कालीन ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को समेटे हुए हैं और आज भी प्रासंगिक हैं। उम्मीद है आपको पसंद आयेगी.  satyashadhak foundation यूट्यूब चैनल पर उनके विचारों को सुन सकते हैं। चौधरी छोटूराम का जीवन परिचय जन्म: 24 नवम्बर 1881, दिल्ली-रोहतक मार्ग पर गांव गढ़ी-सांपला, रोहतक (हरियाणा-तत्कालीन पंजाब सूबा) में       चौधरी सुखीराम एवं श्रीमती सिरयां देवी के घर। 1893 में झज्जर के गांव खेड़ी जट में चौधरी नान्हा राम की सुपुत्राी ज्ञानो देवी से 5 जून को बाल विवाह। शिक्षा: प्राइमरी सांपला से 1895 में झज्जर से 1899 में, मैट्रिक, एफए, बीए सेन्ट स्टीफेन कॉलेज दिल्ली से 1899-1905। कालाकांकर में राजा के पास नौकरी 1905-1909। आगरा से वकालत 1911, जाट स्कूल रोहतक की स्थापना 1913, जाट गजहट (उर्दू साप्ताहिक) 1916, रोहतक जिला कांग्र्रेस कमेटी के प्रथम अध्यक्ष 1916-1920, सर फजले हुसैन के साथ नेशनल यूनियनिस्ट पार्टी (जमींदार लोग) की स्थापना 1923, डायरकी में मंत्राी 1924-1926, लेजिस्लेटिव काउंसिल में विरोधी दल के नेता 1926-1935 व अध्यक्ष 1936, सर की उपाधि 1937, प्रोविन्सियल अटॉनमी में मंत्री 1937-1945, किसानों द्वारा रहबरे आजम की उपाधि से 6 अप्रैल 1944 को विभूषित, भाखड़ा बांध योजना पर हस्ताक्षर 8 जनवरी 1945। निधन: शक्ति भवन (निवास), लाहौर-9 जनवरी 1945। 1923 से 1944 के बीच किसानों के हित में कर्जा बिल, मंडी बिल, बेनामी एक्ट आदि सुनहरे कानूनों के बनाने में प्रमुख भूमिका। 1944 में मोहम्मद अली जिन्ना की पंजाब में साम्प्रदायिक घुसपैठ से भरपूर टक्कर। एक मार्च 1942 को अपनी हीरक जयंती पर उन्होंने घोषणा की-‘मैं मजहब को राजनीति से दूर करके शोषित किसान वर्ग और उपेक्षित ग्रामीण समाज कीसेवा में अपना जीवन खपा रहा हूं।’ भारत विभाजन के घोर विरोधी रहे। 15 अगस्त 1944 को विभाजन के राजाजी फॉर्मुले के खिलाफ गांधी जी को ऐतिहासिक पत्र लिखा।
14:47
June 21, 2021
63. ( किसानी नजरिया ) किसान की कराहट -चौ. छोटूराम
 किसान की कराहट -चौ. छोटूराम चौधरी छोटूराम स्वतंत्रता से पहले किसान नेता व चिंतक-विचारक थे। किसानों को जागृत करने के लिए उन्होंने जाट-गजट नाम का उर्दू साप्ताहिक प्रकाशित किया। इसमें किसानों में व्याप्त बुराइयों, अंधविश्वास, पांखड, अज्ञानता को दूर करने के लिए तीखे लेख लिखे। किसानों का शोषण करने वाले महाजनों, पंडा-पुजारी वर्ग व शासकों को भी खरी खरी सुनाई। हिंदू-मुस्लिम एकता, धार्मिक सद्भाव व भाईचारे के चैंपियन थे। वे भारत-पाक विभाजन के खिलाफ थे। किसानों को संगठित होने व किसान आंदोलन को तीव्र करने के लिए अनेक कार्य किए. यहां उनके लेखों की शृंखला प्रस्तुत की जा रही है। ये लेख तत्कालीन ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को समेटे हुए हैं और आज भी प्रासंगिक हैं। उम्मीद है आपको पसंद आयेगी.  satyashadhak foundation यूट्यूब चैनल पर उनके विचारों को सुन सकते हैं।   चौधरी छोटूराम का जीवन परिचय  जन्म: 24 नवम्बर 1881, दिल्ली-रोहतक मार्ग पर गांव गढ़ी-सांपला, रोहतक (हरियाणा-तत्कालीन पंजाब सूबा) में       चौधरी सुखीराम एवं श्रीमती सिरयां देवी के घर। 1893 में झज्जर के गांव खेड़ी जट में चौधरी नान्हा राम की सुपुत्राी ज्ञानो देवी से 5 जून को बाल विवाह। शिक्षा: प्राइमरी सांपला से 1895 में झज्जर से 1899 में, मैट्रिक, एफए, बीए सेन्ट स्टीफेन कॉलेज दिल्ली से 1899-1905। कालाकांकर में राजा के पास नौकरी 1905-1909। आगरा से वकालत 1911, जाट स्कूल रोहतक की स्थापना 1913, जाट गजहट (उर्दू साप्ताहिक) 1916, रोहतक जिला कांग्र्रेस कमेटी के प्रथम अध्यक्ष 1916-1920, सर फजले हुसैन के साथ नेशनल यूनियनिस्ट पार्टी (जमींदार लोग) की स्थापना 1923, डायरकी में मंत्राी 1924-1926, लेजिस्लेटिव काउंसिल में विरोधी दल के नेता 1926-1935 व अध्यक्ष 1936, सर की उपाधि 1937, प्रोविन्सियल अटॉनमी में मंत्री 1937-1945, किसानों द्वारा रहबरे आजम की उपाधि से 6 अप्रैल 1944 को विभूषित, भाखड़ा बांध योजना पर हस्ताक्षर 8 जनवरी 1945। निधन: शक्ति भवन (निवास), लाहौर-9 जनवरी 1945। 1923 से 1944 के बीच किसानों के हित में कर्जा बिल, मंडी बिल, बेनामी एक्ट आदि सुनहरे कानूनों के बनाने में प्रमुख भूमिका। 1944 में मोहम्मद अली जिन्ना की पंजाब में साम्प्रदायिक घुसपैठ से भरपूर टक्कर। एक मार्च 1942 को अपनी हीरक जयंती पर उन्होंने घोषणा की-‘मैं मजहब को राजनीति से दूर करके शोषित किसान वर्ग और उपेक्षित ग्रामीण समाज कीसेवा में अपना जीवन खपा रहा हूं।’ भारत विभाजन के घोर विरोधी रहे। 15 अगस्त 1944 को विभाजन के राजाजी फॉर्मुले के खिलाफ गांधी जी को ऐतिहासिक पत्र लिखा।
22:09
June 21, 2021
62.Lalkar - Ch. Chotu Ram/ ( किसानी नजरिया ) ललकार - चौ. छोटूराम
Lalkar - Ch. Chotu Ram/ ललकार - चौ. छोटूराम, अनुवाद-हरि सिंह वर्तमान युग तरक्की का युग है, विज्ञान का युग है, ज्ञान और हुनर का युग है, भाषण और लिखाई का युग है, संगठन का युग है! परन्तु बेचारा किसान है कि वर्तमान युग की इन सब विशेषताओं से अनभिज्ञ है। पुरानी कुंड का ठेकरा है और समझता है कि आखिर दुनिया ऐसी भी क्या मानवता से खाली होगी कि इसको एक अपवित्र और व्यर्थ की वस्तु की भांति पांव की ठोकर से ठुकरा दे। क्या भोला बन्दा है! प्रतिदिन देखता है कि जब इन्सान लींबू का रस निकाल चुकता है तो बेरस छिलक को इतनी दूर फैंकता है कि फिर पैर नीचे आकर फिसलने का कारण न बन सके। मेरे प्यारे भाई, आदर के योग्य मेरे प्यारे दहकान भाई, यह तमाशा देखकर भी कोई सबक नहीं सीखा। उफ! मैं भी क्या इन्सान हूं! कैसा सवाल पूछ रहा हूं? किसान की पहचान तो यही है कि देखे और फिर न देखे। इसकी आंख को बारीकी से देखने का अभ्यास नहीं। आंखें से कुआं और जोहड़ तो देख लेता है। बस इसकी देखने की सीमा यहीं तक है। सौ बार ठोकर खाए और फिर भी मार्ग में पड़े पत्थर से सावधान नहीं हो। यही तो किसान की निराली शान है। किसान क्या है? प्राचीन सभ्यता का एक स्मारक है पुरानी संस्कृति का एक बचा हुआ भाग है। समुद्री जहाज आए, रेल आई, तारा आया, बेतार का तार आया, वायुयान आया। विज्ञान के आविष्कारों ने दुनिया छोटी कर दी, अब दूरी का कोई अर्थ नहीं रहा। समुद्र की तह में और आकाश की फिजा में अपने नये यंत्रों की पहुंच का आश्चर्यजनक प्रमाण पेश किया है। परंतु किसान है अपनी पुरानी चाल नहीं बदलता। जमाना बदला, हालात बदले, पड़ौसी बदले। यदि कोई नहीं बदला तो किसान नहीं बदला। वही हल, वही गड्ढा, वही रहट और वही कोल्हू, वही कस्सी और वही खुर्पा। मित्र और शुभचिंतक कहते-कहते थक गए कि भाई हिलो, जमाना हरकत का है। जमाना जुम्बिस (गति) का है। जमाना तरक्की का है, लेकिन जमीन जुम्बद गुल मुहम्मद (जमीन हिल जाए पर मियां गुल मुहम्मद वही रहेगा)। जमींदार शायद समझता है कि न बदलना, न हिलना-जुलना यह भी सदाचार संहिता में शामिल है। जमाना बेशक बदल जाए, लेकिन मेरा बदलना मेरी शान के खिलाफ है। लेकिन जमींदार भाई सुन। यह हठधर्मी छोड़ दे। मैं भी तेरा भाई हूं। तेरी ही बिरादरी का एक छोटा सा सदस्य हूं। तेरा सच्चा शुभचिंतक हूं। तेरे वर्ग का सच्चा हितैषी हूं। तेरी जमायत का सेवक हूं। जाड़े के मौसम में बारीक मलमल के कपड़े पहनना समझदारी नहीं है। यह जमाना बदल गया तो तू भी बदल। अब हालात बदल गए तो भी अपने अंदर तबदीली ला। तीर व तलवार का जमाना गया। अब बंदूक, मशीन गन, बम और विषैली गैसों के शस्त्रों से लड़ाई लड़ी जाती है। अब ढाल तलवार को टांड पर रख दे। अपने-आप को नए शस्त्रों से सुसज्जित कर! यदि ऐसा नहीं करेगा, तो तेरी खैर नहीं। तू शान को मरता है, परन्तु तू यह नहीं देखता कि तेरी हस्ती खतरे में है। तू उच्च आचार का पुजारी बनता है, परन्तु तू यह नहीं देखता कि तेरी हस्ती खतरे में है। तू उच्च आचार का पुजारी बनता है, लेकिन इस बात का पता नहीं कि तेरे ऊंचे आचार-व्यवहार के मजे समाप्त हो गए। तू आईना वफा का दम भरता है, लेकिन तूझे इस बात का पता नहीं कि वर्तमान सभ्यता ने इस चीज को रद्द कर दिया है। तू अपने वर्तमान अंदाज पर लट्टू है।तू अजीब लापरवाही से कहता है: खामोशी गुफ्तगू है, बे जबानी है जबां मेरी (मेरा मौन ही मेरी बातचीत है और न बोलना ही मेरा बोलना है) इकबाल ने इस नज्म में तेरी ही तस्वीर खींची मालूम होती है। इस नज्म के चंद पद बड़े भौडे पैबंद लगाकर पेश करता हूं। शायद ये तुझ पर कुछ प्रभाव डालें। ‘वतन की फिकर कर नादां मुसीबत आने वाली है तिरी बरबादियों के मशविरे हैं आसमानों में जर देख इसको जो कुछ हो रहा है, होने वाला है धरा क्या है भला अहदे कुहन की दास्तानों में यह खामोशी कहां तक? कुव्वते फरियाद पैदा कर ज्मीं पर तू हो और तेरी सदा हो आसमानों में न समझोगे तो मिट जाओगे ओ हिन्दोस्तां वालो तुम्हारी दास्तां तक भी न होगी दास्तानों में’
11:27
June 20, 2021
61 (निबंध) मैं मजदूर हूं - भगवतशरण उपाध्याय
मैं मजदूर हूं - भगवतशरण उपाध्याय
16:32
June 19, 2021
60. ( निबंध ) आचरण की सभ्यता - सरदार पूर्ण सिंह
आचरण की सभ्यता - सरदार पूर्ण सिंह
29:32
June 19, 2021
59. ( निबंध ) समाज और धर्म - संपूर्णानंद
समतामूलक समाज ही सुखी जीवन का आधार है.
13:02
June 18, 2021
58. ( निबंध) मजदूरी और प्रेम (भाग 2) - सरदार पूर्ण सिंह
मजदूरी और प्रेम (भाग 2) - सरदार पूर्ण सिंह
22:43
June 17, 2021
57. ( निबंध )प्रेम और मजदूरी (भाग- 1) - सरदार पूर्ण सिंह
सरदार पूर्ण सिंह  का निबंध प्रेम और मजदूरी (भाग-1)
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June 17, 2021
56 - ( निबंध ) भीष्म को क्षमा नहीं किया गया - आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी
भीष्म को क्षमा नहीं किया गया - आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी सत्ता के अत्याचारों के खिलाफ जो बोलने का साहस नहीं करते वे बुद्धिजीवी महाभारत के भीष्म की तरह हैं. उस मेधा, ज्ञान और बल का क्या जो वक्त पर निर्णय न ले सके और जनहित में उपयोग न हो.
17:60
June 16, 2021
55. ( समीक्षा ) बाबूू भारतेंदु हरिश्चंद्र- प्रेमचंद
बाबूू भारतेंदु हरिश्चंद्र- प्रेमचंद
20:18
June 15, 2021
54 - ( पत्र ) अपनी नजर में - प्रेमचंद
अपनी नजर में - प्रेमचंद प्रेमचंद के दो पत्र जो उन्होंने इंद्रनाथ मदान को लिखे थे, जिसमें उनके प्रश्नों के उत्तर दिए हैं। उससे उनके साहित्यिक सरोकारों व रचना प्रक्रिया का पता चलता है। 
15:14
June 14, 2021
53 - ( निबंध ) मानसिक पराधीनता - प्रेमचंद
मानसिक पराधीनता म दैहिक पराधीनता से मुक्त होना तो चाहते हैं, पर मानसिक पराधीनता में अपने-आपको स्वेच्छा से जकड़ते जा रहे हैं। किसी राष्ट्र या जाति का सबसे बहुमूल्य अंग क्या है? उसकी भाषा, उसकी सभ्यता, उसके विचार, उसका कल्चर। यही कल्चर हिंदू को हिंदू मुसलमान को मुसलमान और ईसाई को ईसाई बनाए हुए हैं। मुसलमान इसी कल्चर की रक्षा के लिए हिंदुओं से अलग रहना चाहता है, उसे भय है, कि सम्मिश्रण से कहीं उसके कल्चर का रूप ही विकृत न हो जाए। इसी तरह हिंदू भी अपने कल्चर की रक्षा करना चाहता है, लेकिन क्या हिंदू और क्या मुसलमान, दोनों अपने कल्चर की रक्षा की दुहाई देते हुए भी उसी कल्चर का गला घोंटने पर तुले हुए हैं। कल्चर (सभ्यता या परिष्कृति) एक व्यापक शब्द है। हमारे धार्मिक विचार, हमारी सामाजिक रूढ़ियाँ, हमारे राजनैतिक सिद्धांत, हमारी भाषा और साहित्य, हमारा रहन-सहन, हमारे आचार-व्यवहार, सब हमारे कल्चर के अंग हैं, पर आज हम अपनी बेदर्दी से उसी कल्चर की जड़ काट रहे हैं। पश्चिम वालों को शक्तिशाली देखकर हम इस भ्रम में पड़ गए हैं, कि हममें सिर से पाँव तक दोष ही दोष हैं, और उनमें सिर से पाँव तक गुण ही गुण। इस अंधभक्ति में हमें उनके दोष भी गुण मालूम होते हैं और अपने गुण भी दोष। भाषा को ही ले लीजिए। आज अंग्रेजी हमारे सभ्य समाज की व्यावहारिक भाषा बनी हुई है। सरकारी भाषा तो वह है ही, दफ्तरों में भी हमें अंग्रेजी में काम करना ही पड़ता है; पर उस भाषा की सत्ता के हम ऐसे भक्त हो गए हैं, कि निजी चिट्ठियों में, घर की बातचीत में भी उसी भाषा का आश्रय लेते हैं। स्त्री पुरुष को अंग्रेजी में पत्र लिखती है, पिता पुत्र को अंग्रेजी में पत्र लिखता है। दो मित्र मिलते हैं, तो अंग्रेजी में वार्तालाप करते हैं, कोई सभा होती है, तो अंग्रेजी में डायरी अंग्रेजी में लिखी जाती है। फ्रांसीसी कवि फ्रेंच में कविता करता है, जर्मन जर्मन में, रूसी रशियन में, कम-से-कम जिन रचनाओं पर उसे गर्व होता है, वह अपनी ही भाषा में करता है; लेकिन हमारे यहाँ के सारे कवि और सारे लेखक अंग्रेजी में लिखने लगें, अगर केवल कोई प्रकाशक उनकी रचनाओं को छापने पर तैयार हो जाए। जिन्हें प्रकाशक मिल जाते हैं, वह चुकते भी नहीं, चाहे अंग्रेज आलोचक उनका मजाक ही क्यों न उड़ावें, मगर वह खुश हैं। हम मानते हैं, कि अंग्रेजी भाषा पौढ़ है, हरेक प्रकार के भावों को आसानी से जाहिर कर सकती है और भारतीय भाषाओं में अभी यह बात नहीं आई लेकिन जब वही लोग, जिन पर भाषा के निर्माण और विकास का दायित्व है, दूसरी भाषा के उपासक हो जायें, तो उनकी अपनी भाषा का भविष्य भी तो शून्य हो जाता है। फिर क्या विदेशी साहित्य की नींव पर आप भारतीय राष्ट्रीयता की दीवार खड़ी करेंगे? यह हिमाकत है। आज हमारा पठित-समाज साधारण जनता से पृथक हो गया है। उसका रहन-सहन, उसकी बोल-चाल, उसकी वेश-भूषा, सभी उसे साधारण समाज से अलग कर रहे हैं। शायद वह अपने दिल में फूला नहीं समाता, कि हम कितने विशिष्ट हैं। शायद वह जनता को नीच और गंवार समझता है, लेकिन वह खुद जनता की नजरों से गिर गया। है। जनता उससे प्रभावित नहीं होती, उसे ‘किरंटा’ या ‘बिगड़ैल’ या ‘साहब बहादुर कहकर उसका बहिष्कार करती है और आज खुदा न खासता वह किसी अंग्रेज के हाथों पिट रहा हो, तो लोग उसकी दुर्गति का मजा उठावेंगे, कोई उसके पास भी न फटकेगा। जरा इस गुलामी को देखिए, कि हमारे विद्यालयों में हिंदी या उर्दू भी अंग्रेजी द्वारा पढ़ाई जाती है। मगर बेचारा हिंदी प्रोफेसर अंग्रेजी में लेक्चर न दें, तो छात्र उसे नालायक समझते हैं। आदमी के मुख से कलंक लग जाए तो वह शरमाता है, उस क्लक को छिपाता है, कम-से-कम उस पर गर्व नहीं करता; पर हम अपनी दासता के कलंक को दिखाते फिरते हैं, उसकी नुमाइश करते हैं, उस पर अभिमान करते हैं, मानो वह नेकनामी का तमाशा हो, या हमारी कीर्ति की ध्वजा वाह री भारतीय दासता, तेरी बलिहारी है!
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June 14, 2021
52 - ( निबंध ) अदभुत अपूर्व स्वप्न - भारतेंदु हरिश्चंद्र
अदभुत अपूर्व स्वप्न - भारतेंदु हरिश्चंद्र आज रात्रि को पर्यंक पर जाते ही अचानक आँख लग गई। सोते में सोचता क्‍या हूँ कि इस चलायमान शरीर का कुछ ठीक नहीं। इस संसार में नाम स्थिर रहने की कोई युक्ति निकल आवे तो अच्‍छा है, क्‍योंकि यहाँ की रीति देख मुझे पूरा विश्‍वास होता है कि इस चपल जीवन का क्षण भर का भरोसा नहीं। ऐसा कहा भी है – स्‍वाँस स्‍वाँस पर हरि भजो वृथा स्‍वाँस मति खोय। ना जाने या स्‍वाँस को आवन होय न होय।। देखो समय-सागर में एक दिन सब संसार अवश्‍य मस्‍त हो जायगा। काल-वश शशि-सूर्य भी नष्‍ट हो जाएँगे। आकाश में तारे भी कुछ काल पीछे दृष्टि न आवेंगे। केवल कीर्ति-कमल संसार-सरवर में रहे वा न रहे, और सब तो एक न एक दिन तप्‍त तवे की बूँद हुए बैठे हैं। इस हेतु बहुत काल तक सोच-समझ प्रथम यह विचारा कि कोई देवालय बनाकर छोड़ जाऊँ, परंतु थोड़ी ही देर में समझ में आ गया कि इन दिनों की सभ्‍यता के अनुसार इससे बड़ी कोई मूर्खता नहीं और वह तो मुझे भली भाँति मालूम है कि यह अँगरेजी शिक्षा रही तो मंदिर की ओर मुख फेरकर भी कोई न देखेगा। इस कारण इस विचार का परित्‍याग करना पड़ा। फिर पडे-पडे पुस्‍तक रचने की सूझी। परंतु इस विचार में बडे काँटे निकले। क्‍योंकि बनाने की देर न होगी कि कीट ‘क्रिटिक’ काटकर आधी से अधिक निगल जाएँगे। यश के स्‍थान, शुद्ध अपयश प्राप्‍त होगा। जब देखा कि अब टूटे-फूटे विचार से काम न चलेगा, तब लाड़िली नींद को दो रात पड़ोसियों के घर भेज आँख बंद कर शंभु की समाधि लगा गया, यहाँ तक कि इकसठ वा इक्‍यावन वर्ष उसी ध्‍यान में बीत गए। अंत में एक मित्र के बल से अति उत्‍तम बात की पूँछ हाथ में पड़ गई। स्‍वप्‍न ही में प्रभात होते ही पाठशाला बनाने का विचार दृढ़ किया। परंतु जब थैली में हाथ डाला, तो केवल ग्‍यारह गाड़ी ही मुहरें निकलीं। आप जानते हैं इतने में मेरी अपूर्व पाठशाला का एक कोना भी नहीं बन सकता था। निदान अपने इष्‍ट-मित्रों की भी सहायता लेनी पड़ी। ईश्‍वर को कोटि धन्‍यवाद देता हूँ जिसने हमारी ऐसी सुनी। यदि ईंटों के ठौर मुहर चिनवा लेते तब भी तो दस-पाँच रेल रूपये और खर्च पड़ते। होते-होते सब हरि-कृपा से बनकर ठीक हुआ। इसमें जितना समस्‍त व्‍यय हुआ वह तो मुझे स्‍मरण नहीं है, परंतु इतना अपने मुंशी से मैंने सुना था कि एक का अंक और तीन सौ सत्‍तासी शून्‍य अकेले पानी में पड़े थे। बनने को तो एक क्षण में सब बन गया था, परंतु उसके काम